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Deepawali 2018 Pooja Muhurt

  दिनांक – 07. 11. 18 प्रदोष काल – अमृत चौघडिया – 17:30 से 20:11 PM  तक – दीप दान , लक्ष्मी गणेश पूजन , प्रसाद वितरण , धर्म स्थान पर दीपक जलना शुभ रहेगा . निषिद्ध काल – 19.53 से

विज्ञान भैरव तंत्र के सूत्र

माता पार्वती के यह प्रश्न पूछने पर की ” ईश्वर कौन है” और “क्या है ?” भगवन शंकर उन्हें सीधे उत्तर न देके निम्नलिखित विधियां बताते है, जोकि ११२ है। किसी न किसी रूप में, सभी ग्रन्थ, धर्मो में इन्ही

Hawan Method in Hindi

  सामग्री  हवन कुंड, कपास बाती, कुछ फूल, चावल के दाने, घी, हवन  सामग्री , आम की लकड़ी , माचिस, कपूर, पंच मेवा, नारियल गोला  विधि – हवन करने वाली जगह को साफ करे । एक टाइल / ईंट/बालू  पर

नकारात्मक स्थिति से कैसे निपटें

सकारात्मक व्यक्तियों पर नकारात्मक ऊर्जा अर्थात तमो गुण का प्रभाव कभी कभी अधिक  हो जाता है. तमो गुण के प्रभाव  कारण वह अपनी आध्यात्मिक यात्रा में स्वयं ही बाधा उत्पन्न  कर लेते है और वर्तमान ऊर्जा के स्तर से नीचे गिर जाते है.

ऊर्जा देने की क्षमता

किसी अन्य व्यक्ति को ऊर्जा देने के लिए निम्नलिखित बिदु अत्यंत महत्वपूर्ण है –

ग्रहणशीलता का अर्थ

  जब इश्वर की चेतना अर्थात शक्ति कण कण में विद्यमान है तो क्या कारण है कि हम उस ऊर्जा को ग्रहण नहीं कर पाते है. इसका मुख्य कारण है जाग्रति का अभाव. इस अभाव के कारण हम ऊर्जा के

ऊर्जा का हस्तांतरण – भाग-3

इश्वर की अनंत ऊर्जा इस ब्रह्माण्ड में विशाल मात्रा में उपस्थित है. इस ऊर्जा को हम दो परिस्थितियों में ग्रहण करते है – ज्ञात अवस्था और अज्ञात अवस्था . अज्ञात अवस्था होती है – निंद्रा की अवस्था जिसमे हम एक

ऊर्जा का हस्तांतरण – भाग-2

  आध्यात्मिक उर्जा का क्षय दो व्यक्तियों के मध्य सकारात्मक ऊर्जा का आदान प्रदान हो यह आवश्यक नहीं. इसका अर्थ यह है कि नकारात्मक ऊर्जा किसी दुसरे व्यक्ति से सात्विक व्यक्ति को बिना किसी चेतावनी के शांत रूप में प्रवेश

ऊर्जा का हस्तांतरण – भाग-१

ऊर्जा के आवागमन के सिद्धांत को निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार पर सहजता से समझा जा सकता है  – * दो रूपों में होता है – सकारात्मक और नकारात्मक * दो लोगों के मध्य होता है – उच्च केंद्र में स्थित

अध्यात्मिक उर्जा का क्षय कैसे हो जाता है

मनुष्य के साथ सबसे बड़ी समस्या ही यह है की वह उर्जा के नियमो से अवगत नहीं है. अध्यात्मिक शक्ति अर्थात  उर्जा का, मंत्र इत्यादि क्रियाओं से आहवाहन तो हो सकता है किन्तु दिव्य उर्जा को संचित कर उसका उचित समय